
- कई दिग्गज चल रहे हैं नाराज, प्रधानमंत्री के दौरा से भी रहें दूर
- दुमका सांसद व हजारीबाग के सांसद ने पार्टी की बैठक से बनायी है दूरी
- गिरिडीह के पूर्व सांसद लगा रहे हैं कांग्रेस कार्यालय का चक्कर
- असंतुष्टों की लिस्ट में एक विधायक, एक पूर्व विधायक समेत शामिल हैं बड़े चेहरे
संदीप सिंह की रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी मिशन 2024 के लिए हर तरह की जोर आजमाईश कर रही है. भाजपा अबकी बार 400 के पार के नारा के साथ चुनावी मैदान में उतरी है. झारखंड की सभी 14 सीट पर जीत का दावा कर रही है. लेकिन, भाजपा के अंदरखाने सबकुछ ठीक प्रतीत नहीं हो रहा है. भाजपा की गतिविधि पर नजर रखने वाले लोगों की माने तो भाजपा बाहर से जितनी आक्रमक दिख रही है, अंदर से उतनी ही बैचेन भी है. कारण है आंतरिक नाराजगी. नाराजगी का दौर इस कदर बढ़ा हुआ है कि झारखंड के भाजपा नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरा को भी नजरअंदाज कर रहे हैं. प्रधानमंत्री के दौरा से दूरी बना रहे हैं. गुरूवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में चुनावी सभा करने से पहले झारखंड के बाबाधाम यानी देवघर पहुंचे. देवघर हवाई अड्डा पर भाजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे, दुमका से भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन, राजमहल से भाजपा प्रत्याशी ताला मरांडी,, देवघर विधायक नारायण दास, राजमहल विधायक अनंत ओझा प्रधानमंत्री का स्वागत करने पहुंचे. लेकिन, दुमका के मौजूदा सांसद सुनील सोरेन स्वागत कार्यक्रम से दूरी बनायी. जबकि, इनका नाम सूची में शामिल था. बताते चले कि मंगलवार को रांची में हुई एनडीए की संयुक्त बैठक से भी सुनील सोरेन ने दूरी बनायी थी.
जानकारों की माने तो सुनील सोरेन फिलहाल बीजेपी से नाराज चल रहे हैं. सुनील सोरेन भाजपा के उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जिन्होने शिबू सोरेन परिवार के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद की. ना सिर्फ आवाज बुलंद की, बल्कि 2019 में शिबू सोरेन को उनके गढ़ यानी दुमका में पटखनी भी दी. 2024 लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने उन्हें प्रत्याशी भी घोषित किया. लेकिन, बाद में शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन भाजपा में शामिल हुई और भाजपा ने सुनील सोरेन की जगह सीता सोरेन को दुमका लोकसभा से प्रत्याशी घोषित कर दिया. इसके बाद से सुनील सोरेन नाराज चल रहे हैं. सुनील सोरेन ने इसका विरोध उच्च स्तर के भाजपा अधिकारियों के सामने भी किया. लेकिन, इसका कोई असर नहीं हुआ. जानकार बताते हैं, दुमका क्षेत्र में सुनील सोरेन लगातार सक्रिय रहे हैं. 2019 में जीत के बाद भी दुमका क्षेत्र के घर-घर तक पहुंच बनाने की दिशा में लगे रहे थे. मेहनत का फल आखिरी दौर में किसी अन्य को मिल जाने के कारण सुनील सोरेन नाराज दिख रहे हैं.
झारखंड भाजपा में सिर्फ दुमका के वर्तमान सांसद सुनील सोरेन ही नाराज नहीं बताये जा रहे हैं, बल्कि हजारीबाग के मौजूदा सांसद जयंत सिन्हा का नाम भी लिस्ट में शामिल है. मंगलवार को रांची में एकजुटता दिखाये जाने वाली एनडीए की बैठक में हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा ने भी दूरी बनायी थी. ठीक इसके एक दिन बाद जयंत सिन्हा के पिता भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा ने बकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर एनडीए पर निशाना भी साधा था. बताते चले कि हजारीबाग से जयंत सिन्हा ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था. हालांकि, राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा आम है कि जयंत सिन्हा का टिकट भाजपा आलाकमान ने काट दिया था, इसके बाद दरियादिली दिखाने के लिए जयंत सिन्हा ने चुनाव लड़ने से इंकार की बात कही थी.
भाजपा के दो सांसद के अलावा गिरिडीह के पूर्व सांसद रविंद्र कुमार पांडेय भी पार्टी से नाराज चल रहे हैं. रविंद्र कुमार पांडेय गिरिडीह से 05 बार सांसद रह चुके हैं. 2019 में आजसू से गठबंधन के नाम पर रविंद्र कुमार पांडेय का टिकट काट दिया गया. इसके बाद भी वह भाजपा में बने रहे. 2020 से 2022 के कोरोना काल में रविंद्र कुमार पांडेय क्षेत्र में मौजूदा गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की तुलना में सक्रिय रहे. 2024 के शुरुआती दौर में जब भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए रायशुमारी की तो, रविंद्र कुमार पांडेय का नाम ही सबसे आगे था. लेकिन, अंत में टिकट गठबंधन के तहत आजसू को मिल गया. इससे रविंद्र कुमार पांडेय नाराज हुए, फिलहाल रविंद्र कुमार पांडेय कांग्रेस कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. दो बार कांग्रेस कार्यालय से उनकी तस्वीर बाहर निकला है. रांची के पूर्व सांसद व रांची क्षेत्र में जनसंघ को खड़ा करने वाले रामटहल चौधरी पिछले दिनों कांग्रेस में शामिल हो गये हैं. इससे पहले मांडू से भाजपा के विधायक रहे ओबीसी के बड़े चेहरे जयप्रकाश भाई पटेल कांग्रेस में शामिल होकर, हजारीबाग से महागठबंधन के उम्मीदवार बन चुके हैं.
भाजपा आलकमान बंद किये हुए आंख
झारखंड भाजपा में नाराज नेताओं की लिस्ट यहीं तक नहीं है. चतरा में कालीचरण सिंह के उम्मीदवार घोषणा होने के बाद भाजपा के ओबीसी चेहरा माने जाने वाले राजधानी यादव भी नाराज हैं. उनके समर्थकों ने प्रदेश कार्यालय में नारेबाजी तक की है. राजनीतिक गलियारा में ये नाम सामने हैं, जो विरोध दर्ज करा चुके हैं. लेकिन, कई ऐसे चेहरे भी हैं जो अंदरखाने नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं. इनमें एक नाम पलामू प्रमंडल क्षेत्र के एक विधायक का नाम सामने आ रहा है. इसके अलावा कोल्हान प्रमंडल के एक नेता नाराज बताये जा रहे हैं. उनके बारे में कहा जा रहा है कि वे या तो पार्टी बदलेंगे या फिर भाजपा के उम्मीदवार के खिलाफ काम करेंगे. पूर्व विधायक राज पलीवार की स्थिति ऐसी हो गयी है कि उन्हें हर दिन सफाई देनी पड़ रही है. बताया जा रहा है कि एक सांसद की करनी से वो बहुत नाराज हैं. लेकिन, भाजपा आलाकमान इनके बीच सुलह कराने की जगह आंख बंद किये हुए है. आगामी चुनाव में इसका असर देखना बाकी है.
झारखंड में बाहरी-भीतरी का खेल भी बीजेपी के लिए सिरदर्द
झारखंड भाजपा की आंतरिक बैचेनी सिर्फ इन नेताओं के कारण ही नहीं है. भाजपा की बैचेनी का मुख्य कारण झारखंड में चल रहे बाहरी व भीतरी का खेल भी है. जिस तरह चतरा में स्थानीय उम्मीदवार देने की मांग हुई. और जिस तरह धनबाद से पीएन सिंह की जगह ढुल्लु महतो को टिकट मिलने पर सोशल मीडिया पर स्थानीय के नाम पर श्री महतो का समर्थन मिला, यह अंदरखाने भाजपा को परेशान कर रही है. जानकारों की माने तो बाहरी-भीतरी के खेल से भाजपा को नुकसान हो सकता है. कारण यह कि 2019 चुनाव तक कथित रूप से बाहरी कहे जाने वाले लोगों ने भाजपा का समर्थन किया है. अब 2024 की चुनावी लड़ाई में अगर बात बाहरी-भीतरी की हुई तो कथित रूप से बाहरी कहे जाने वाले भाजपा से बिदक सकते हैं या फिर चुनाव में हिस्सा लेने से बचेंगे. भाजपा की परेशानी सिर्फ कथित रूप से बाहरी कहे जाने वाले वोटर्स का छिटकना ही नहीं है, बल्कि भीतरी यानी लोकल वोटर की एकजुटता भी परेशानी का कारण है. 2024 के चुनाव में जयराम महतो एक फैक्टर बने हैं, जो लोकल वोटर्स खासकर युवाओं को अपनी ओर खींच रहे हैं. इसके अलावा लोकल वोटर्स पर झामुमो समेत विपक्षी दल का प्रभाव भी पहले से रहा है.