नवरात्र : देवी पूजा के साथ छिपा है बड़ा वैज्ञानिक आधार

  • मौसम परिवर्तन के समय उपवास करने से शरीर होता है डिटॉक्स

पंकज सिंह की रिपोर्ट

चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है. सनातन धर्म में नवरात्र का अर्थ मात्र देवी पूजा तक ही सीमित नहीं, बल्कि इसके वैज्ञानिक आधार भी है. लोग नवरात्र को मात्र धार्मिक पहलू की दृष्टि से देखते है, पर इसके वैज्ञानिक आधार भी हैं. तमाम पर्वो के पीछे यह तर्क तलाशना आवश्यक हो जाता है कि आखिर हमें इन पर्वो को मनाने से अपने और समाज के कौन सी सिद्धि को साध पाते हैं? साल में दो बार अधिकांशतः अप्रैल व अक्टूबर में नवरात्र मनाया जाता है. ये दोनों ही समय गणित के आधार पर ही निकाले जाते हैं. नवरात्र के साल में दो बार आने के पीछे पर्यावरण परिवर्तन से इनका सीधा जुड़ाव है, जिसका मनुष्य एक हिस्सा है.

अप्रैल और अक्टूबर दो ऐसे माह है, जिनमें मौसम परिवर्तन होता है. अप्रैल में शीतकालीन मौसम खत्म होकर ग्रीष्म ऋतु शुरू हो जाती है. वहीं अक्टूबर में शीतकालीन ऋतु की तरफ हम प्रवेश करते हैं. यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि इन्हीं दो समय में फसलों के उत्पादन में भी बड़ा परिवर्तन होता है. अप्रैल में गेहूं की कटाई होती है. इसका मतलब है कि हमारे भोजन में प्रमुख रूप से शीतकाल में जो कुछ भी पैदा हुआ है, उसको सेवन करने का समय ग्रीष्मकाल है. इसी तरह अन्य फसले जो ग्रीष्मकालीन अवस्थाओं में पैदा होती हैं, वो शीतकाल में हमारा भोजन बनती है.

हर मौसम में शरीर का व्यवहार व मेटाबालिज्म अलग हो जाता है. इसमें नौ दिनों का भी अपना महत्व होता है, क्योंकि नौ दिनों में किसी भी शरीर का पर्याप्त रूप से विषहरण यानी डिटॉक्स हो जाता है. मतलब जब हमारे भोजन में परिवर्तन होता है तो शरीर को अवसर दिया जाना चाहिए की नए भोजन के लिए तैयार हो. उसके लिए जो पूर्व में लिया गया भोजन हो, उससे जुड़े तमाम तरह के विषैले पदार्थों से मुक्त हो. इसके लिए 09 दिन चाहिए होते हैं. नवरात्र में हम मां भगवती के 09 रूप से जुड़ते हैं. सभी रूपों में देवियां प्रकृति या सामाजिक पहलुओं की अभिव्यक्ति से जुड़ी हैं.  

संपूर्ण संख्या है 09

नौ दिन को पृथ्वी समेत नौ ग्रह से जोड़कर देखा जा सकता है, जिनका किसी न किसी रूप से हमारे शरीर से सीधा संदर्भ व संपर्क होता है. पृथ्वी गुरुत्वाकर्षण पर टिकी हुई है और सभी तरह के ग्रह-उपग्रह इसी शक्ति से अपने-अपने स्थानों से व्यवहार करते हैं. इन नौ ग्रहों का हमारे शरीर पर भी गुरुत्वाकर्षण प्रभाव होता है. इसलिए नौ की संख्या को ज्यादा महत्व मिला है. नौ खुद में संपूर्ण संख्या है. मतलब नौ की संख्या को जब हम किसी भी संख्या से गुणा करेंगे तो योग अंततः 09 ही प्राप्त होता है. दुर्भाग्य यह है कि हमने कभी नवरात्र के वैज्ञानिक पहलू पर ध्यान नहीं दिया. नवरात्र इस देश की एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक पहल है और सत्य यह है कि इस सोच को देश-दुनिया में भी बांटा जाना चाहिए.

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