लेखक : डॉ नरेंद्र कुमार राय, बौद्धिक शिक्षण प्रमुख– धनबाद विभाग ( राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ )
विश्व का सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ज्ञानी जनों के लिए एक आकर्षण तथा उत्सुकता का केंद्र बना हुआ है। आज विश्व के राजनीतिक पटल पर घटते घटनाक्रमों पर ध्यान रखने वाले विद्वान जन भारत की इस संघ शक्ति के बारे में जानने के लिए लालायित हैं। नित्य प्रति लगने वाली हजारों शाखाओं में लाखों स्वयंसेवकों के मन में राष्ट्र भाव का जागरण, अपनी संस्कृति के प्रति आदर भाव का जागरण तथा हिंदू भाव की बुझी हुई राख में धधकती ज्वाला का संचरण संघ किस प्रकार करता है, विघटनकारी शक्तियों की राह में यह एक विशाल चट्टानी रोड़ा किस प्रकार बन जाता है, यह विश्व के लिए शोध का विषय बना हुआ है। शाखा संघ की एक ऐसी अभिनव पद्धति है जिसमें निखर कर स्वयंसेवक राष्ट्र के खोए हुए गौरव को पुनः प्राप्त करने के लिए सचेष्ट होता है ।अपने सैकड़ो संगठनों के माध्यम से संघ भारत को परम वैभव के शिखर की ओर ले जाने के लिए कृत संकल्प है । इस अद्भुत संघ की स्थापना डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी । आइए आज हम जानते हैं कि संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि क्या है, डॉक्टर हेडगेवार ने संघ की स्थापना क्यों की?
डॉ केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पिता पुरोहिताई के द्वारा घर का खर्च चलाते थे । कहते हैं कि जहां बूढ़ों का संग वहां खर्ची का दान, जहां लड़को का संग वहां बाजे मृदंग । बालक केशव को गरीबी से क्या मतलब। अगल-बगल के बच्चों के साथ मस्ती होती रहती थी। सड़क पर घूमते हुए सीताबार्डी के किले पर फहरता हुआ यूनियन जैक बालक केशव की आंखों में खटकता था, विदेशी रानी विक्टोरिया के राज्य के 60 साल पूरे होने पर खुशी में मिठाई बांटना तथा मिठाई खाना उनके लिए लज्जा का विषय था तथा सप्तम एडवर्ड के राज्याभिषेक के अवसर पर हम भारतवासियों द्वारा पटाखे फोड़कर खुशियां मनाना मूर्खता लगती थी।
To be cont…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि. प्रथम अंक
डॉ नरेंद्र कुमार राय, बौद्धिक शिक्षण प्रमुख– धनबाद विभाग ( राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ )