66वां नवाहन श्रीश्री राम चरित्र मानस पाठ एवं महायज्ञ के पांचवे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं का भीड़
संदीप सिंह की रिपोर्ट
करगली(बेरमो)। करगली गेट स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में मानस सत्संग समिति, बेरमो की ओर से आयोजित नौ दिवसीय 66वां नवाहन श्रीश्री रामचरित मानस पाठ व महायज्ञ के पांचवें दिन परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से दोपहर तक सभी श्रद्धालुओं ने परिक्रमा के साथ पूजा अर्चना की। मानस पाठ व भवन अमंगल हारी द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी के पूरा गुंजायमान रहा।
राम और रामचरित मानस को आत्मसात करने की जरूरत
उज्जैन से आये कथावाचक परम पूज्य पंडित श्री बाल कृष्ण शास्त्री जी ने संगीतमय प्रवचन में कहा कि रामचरितमानस पूरे मानव जगत का आदर्श जीवन दर्शन है। मानस में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अनोखा संगम दिखाई पड़ता है। माता-पिता, गुरुजनों और अग्रजों का सम्मान, भाई-भाई में परस्पर प्रेम, त्याग और सहनशीलता का उदाहरण कहीं अन्यत्र नहीं दिखाई पड़़ता है। प्रवचन देते हुए स्वामी रामबिहारी शरण ने रामचरित मानस के कई प्रसंगों की व्याख्या करते हुए कहा कि लोग भौतिकता की ओर भाग रहे हैं, स्वार्थ और लालच में भाई-भाई का खून बहा रहा है व मर्यादा और रिश्तों को कलंकित कर रहे हैं, ऐसे में आवश्यकता है कि एक बार फिर से हम सभी सत्य सनातन धर्म की ओर लौटे और रामचरितमानस को आत्मसात करे ताकि फिर से रामराज्य आ सके।
यज्ञ को सफल बनाने में यज्ञ समिति के मनोज सिंह, सुशील सिंह, नितेश सिंह, अर्चना सिंह, निरंजन सिंह, जयप्रकाश सिंह, गजेंद्र प्रसाद सिंह, प्रशांत सिंह, शशिकांत सिंह, जितेंद्र सिंह, मिट्ठू, रवि राम, अमरेंद्र दुबे, गौरी शंकर सिंह, वीरेंद्र सिंह, योगेंद्र सिंह, राजू सिंह सहित पूरे बेरमो के प्रबुद्ध लोग मुख्य रूप से योगदान दे रहे हैं।
मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी से गुंजायमान करगली
