
भाजपा के आंतरिक सर्वे में जयराम नाम की हुई चर्चा, कुर्मी बहुल सीट को प्रभावित करने का अनुमान
कुमार अभय की रिपोर्ट
कोयला नगरी के नाम से प्रसिद्ध धनबाद से लगभग 33 किमी की दूरी पर बसा है, तोपचांची का मानटांड गांव. 27 सितंबर 1994 को इस गांव में एक बच्चे का जन्म हुआ. नाम रखा गया जयराम महतो. जयराम महतो के पिता का स्वर्गवास झारखंड आंदोलन के दौरान हुआ, वह भी उस समय जब जयराम महतो कुछ साल के ही थे. जैसे अभिमन्यु को गर्भ में ही चक्रव्यूह तोड़ने की शिक्षा मिल गयी थी और महाभारत युद्ध में बड़े–बड़े योद्धा को धूल चटाई थी, ठीक वैसे ही जयराम महतो को आंदोलन की सीख गर्भ में ही मिला है और वर्तमान में झारखंड राजनीति के केंद्र में खड़े हो गए हैं. वर्तमान स्थिति यह है कि जयराम महतो जो बोलते हैं, वह सुर्खियां बनती है. इतना ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भी जयराम महतो के नाम से बैचेन है. सही पढ़ा आपने, दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी जयराम महतो के नाम से बैचेन है. भाजपा सूत्रों की माने तो पार्टी के तमाम आंतरिक सर्वे में जयराम महतो के नाम की चर्चा हुई है. ना सिर्फ चर्चा हुई, बल्कि जयराम महतो व उनकी पार्टी को टैकल करने की रणनीति भी बनायी गयी है.
जयराम महतो को लेकर भाजपा ने जो सर्वे कराया गया है, उनमें जयराम महतो की जाति, जयराम महतो की राजनीति, राजनीतिक आधार, 1932 स्थानीय नीति व जयराम महतो का प्रभाव, क्षेत्र में महतो उपनाम के उम्मीदवार का विकल्प… ऐसे कई सवाल किया गया है. इसे जयराम महतो व उनकी पार्टी का असर ही माना जा रहा है कि भाजपा ने धनबाद व चतरा जैसे लोकसभा क्षेत्र में दशकों बाद स्थानीय उम्मीदवार लोकसभा में उतारा है. चतरा में कालीचरण सिंह को तो धनबाद में बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो को उम्मीदवार बनाया गया है. इससे पहले दोनों क्षेत्र के उम्मीदवार बिहार से आते थे. लेकिन, 2024 चुनाव में स्थानीय उम्मीदवारों पर भाजपा ने भरोसा जताया है. इतना ही नहीं, उम्मीदवार घोषणा के बाद भी भाजपा की ओर लगातार टेलीफोनिक सर्वे किया जा रहा है. इससे समझा जा सकता है कि जयराम महतो के रूप में झारखंड में राजनीति का एक नया कोण उभरा है. झारखंड में राजनीतिक का जो जातीय समीकरण है, वह भी जयराम महतो के कद व प्रभाव को बढ़ाने में सहयोगी बन रहा है. जयराम महतो कुर्मी जाति से आते हैं. इस जाति का प्रभाव झारखंड के हर लोकसभा सीट पर है. उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की हर सीट पर यह जाति ही उम्मीदवार के जीत व हार का फैसला करती है. पुरे प्रदेश की बात करें तो कुरमी जाति को आदिवासियों के बाद सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है.
साधारण सी अलग स्टाईल लोगों को कर रहा है आकर्षित
जयराम महतो जहां भी भाषण देने जाते हैं, लोगों का हुजूम उमड़ जाता है. झारखंड के छोटे-बड़े गांव-कस्बों में चार पहिया वाहन के छत पर खड़ा होकर वह भाषण देते हैं और उन्हें सुनने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं. जयराम महतो के भाषण में स्थानीय मुद्दों के अलावा युवाओं को रोजगार, भाषा, हक-अधिकार की बात होती है. स्थानीय भाषा खोरठा व हिंदी के मिश्रण में इनके भाषण का असर आम लोग खास कर युवाओं पर गहरा हो रहा है. जयराम महतो ने झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति नाम का राजनीतिक संगठन बनाया है. झारखंड के कई लोकसभा सीट से उम्मीदवार देने की घोषणा भी संगठन की ओर से किया गया है.
गिरिडीह सीट से हैं उम्मीदवार
झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति ने जयराम महतो को गिरिडीह लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. जयराम महतो चुनावी समर में कितने सफल होंगे, इसकी जानकारी तो 04 जून को मिलेगी. लेकिन, इनकी तैयारी अन्य किसी उम्मीदवार से कम नहीं आंकी जा सकती है. आर्थिक रूप से कमजोर जयराम महतो के साथ युवाओं का हुजूम है, जो किसी भी चुनाव में पासा पलटने में माहिर होता है.
