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चंपाई सोरेन के बीजेपी में आने से पार्टी को फायदा या…

पुण्य प्रसून की कलम से

चंपाई सोरेन 30 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे। लंबे अरसे से बीजेपी श्री सोरेन को पार्टी में शामिल कराने की रणनीति पर काम कर रही थी। अब तस्वीर साफ हो गई है। श्री सोरेन के बीजेपी में शामिल होने को सीधे तौर पर आने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है। बीजेपी को होने वाले फायदा और नुकसान से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में पत्रकार पुण्य प्रसून जी ने आकलन किया है।

पुण्य प्रसून की माने तो चंपई सोरेन के भाजपा में आने से पार्टी को कोल्हान में बहुत अधिक फ़ायदा नहीं होगा, उल्टे नुकसान की संभावना अधिक है। समझिए कैसे?

  1. आंकड़ों से समझिए:

सरायकेला में पिछले दो- तीन विधानसभा चुनावों के आंकड़े देखिए।

2005 में चंपई सोरेन को मिले 61112 वोट, और भाजपा के लक्ष्मण टुडू को मिले 60230 वोट, यानि चंपई सोरेन महज 883 वोट से जीते

2009 में चंपई सोरेन को 57156 वोट मिले, भाजपा के लक्षण टुडू को 53910। चंपई की जीत का मार्जिन 3246 वोट रहा

2014 में चंपई सोरेन को 94746 वोट मिले और भाजपा के गणेश महली को 93631। यानि चंपई की जीत का मार्जिन रहा 1115 वोट

इस बार तो चंपई सोरेन के खिलाफ़ जबरदस्त एंटी इन्कम्बेंसी थी।

  1. इस बार क्या बदला है?

चंपई सोरेन मुख्यमंत्री पद पर थे, उनसे उम्मीदें बहुत बढ़ गईं थीं, लेकिन कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं कर सकें।

चंपई सोरेन के भाजपा में चले जाने से आदिवासी वोटर भी भाजपा में शिफ्ट हो जाएंगे, ये मान लेना बचकाना होगा। उल्टा आदिवासी वोटर्स के बीच वो गद्दार के रूप में प्रचारित किए जा रहे हैं। “देखिए, हेमंत ने उन्हें सीएम बनाया, पर वो उनसे ही गद्दारी कर बैठे”, ये आम चर्चा है।

  1. बेटे की ख़राब छवि

चंपई सोरेन ईमानदार और सरल होंगे, लेकिन उनके बेटे की छवि भ्रष्ट और गुंडे जैसी है। पत्रकार तक को पिट दिया था। चंपई सोरेन के सीएम रहते बेटे ने क्या गुल खिलाए हैं, कभी पता लगाएं। सुनने में आ रहा है कि उसी बेटे को टिकट देने की डील हुई है। अगर ऐसा है तो गई भैंस पानी में।

  1. रमेश हांसदा, गणेश महली का क्या होगा?

हमारे पास जो सूचना है उसके अनुसार रमेश हांसदा अपना पॉलिटिकल कैरियर बर्बाद नहीं करेंगे। 28 को हेमंत सोरेन के दौरे के दौरान वो झामुमो का दामन थाम सकते हैं। गणेश महली बहुत ही ज्यादा व्यथित हैं। इस बार उन्हें लग रहा था कि वो चुनाव जीत सकते हैं, लेकिन ऊपर से खेल हो गया। वो शांत बैठ गए तो भाजपा के लिए मुश्किल होगी।

  1. चंचल गोस्वामी की भूमिका और प्रदेश भाजपा इकाई

बताया जाता है कि चंपई सोरेन के भाजपा में शामिल होने को लेकर प्रदेश यूनिट को किनारे रखा गया। चंचल गोस्वामी के हेमंत विश्व शरमा के साथ पुराने संबंध थे। सारा काम उन्होंने, रांची के एक पत्रकार और चंपई के बेटे ने किया है। एक नेता ठंडी आह भर कर कहते हैं, “चंपई सोरेन अलग पार्टी बनाकर लड़ते तो भाजपा को ज़्यादा फ़ायदा था”…

लेखक: पुण्य प्रसून झारखंड के जाने माने पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।

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