हो जाईये सावधान…नहीं तो बूंद-बूंद को तरसेगा बोकारो

  • जिला में भविष्य उपयोग के लिए बचा है मात्र 12501.03 एचएएम शुद्ध भूजल
  • एक साल में 8152.23 एचएएम शुद्ध भूजल की आयी कमी

अभय कुमार व संदीप सिंह की रिपोर्ट

अभी गरमी का मौसम पुरी तरह से आया नहीं है. ये दिन बादलों की आवाजाही भी जारी है. बावजूद इसके पेयजल संकट गहराने लगा है. खासकर शहरी क्षेत्र में बोरिंग व चापाकल धोखा देने की स्थिति में आ गये हैं. लेकिन, यह शुरुआत मात्र है. अगर लोग अभी भी नहीं सुधरे तो बोकारो जिला बूंद-बूंद को तरसेगा. बिल्कुल सही पढ़ा आपने, बोकारो जिला बूंद-बूंद को तरसेगा. यह हम नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट बता रही है. भारत सरकार की डायनेमिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स की 2023 की रिपोर्ट की माने तो बोकारो जिला की स्थिति बिगड़ती ही जा रही है. जिला में भविष्य उपयोग के लिए मात्र 12501.03 एचएएम शुद्ध भूजल ही बचा है. एक साल में बोकारो जिला में भविष्य उपयोग के लिए भूजल की स्थिति में 8152.23 एचएएम की कमी आयी है. 2022 की रिपोर्ट की माने तो बोकारो जिला में 20653.26 एचएएम भविष्य उपयोग के लिए था. जबकि 2023 की रिपोर्ट में यह घटकर 12501.03 एचएएम हो गया है. इतना ही नहीं एक साल में भूजल दोहन का चरण 30 से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया. यानी भूजल दोहन में 12 प्रतिशत का इजाफा हुआ है.

बोकारो में रिचार्ज नहीं हो पा रहा है भूमिगत जल!

बोकारो लिए चिंता का कारण सिर्फ यह नहीं है कि भविष्य उपयोग के लिए भूजल में कमी आ रही है. असली चिंता का कारण यह है कि भूजल रिचार्ज भी नहीं हो रहा है. 2022 के मुकाबले 2023 में 8986.74 एचएएम की कमी आयी है. 2023 में कुल 22520.76 एचएएम भूजल रिचार्ज हुआ है, जबकि 2022 में यह 31507.50 एचएएम था. 2023 के रिपोर्ट के अनुसार मानसून समय में वर्षा से 18003.58 एचएएम व अन्य स्त्रोत से 1458.23 एचएएम भूजल रिचार्ज हुआ.

इंसान मशीन व खेत से ज्यादा कर रहा है खपत

बोकारो जिला को औद्योगिक रूप से समृद्ध जिला माना जाता है. पीएसयू की कई इकाई यहां स्थापित है. 33 हजार हेक्टेयर में खेती होती है. लेकिन, जिला में पानी की सबसे अधिक खपत ना तो उद्योग में होता है और ना ही कृषि क्षेत्र में होती है. जिला में पानी की सबसे अधिक खपत घरेलू उपयोग में होता है. रिपोर्ट की माने तो जिला में घरेलू उपयोग में 4384.12 एचएएम भूजल की खपत होती है. इसके बाद सिंचाई के लिए 2393 एचएएम भूजल की खपत होती है, वहीं उद्योग में 2057.92 एचएएल भूजल का इस्तेमाल किया जाता है.

बेरमो प्रखंड में स्थिति बद से बदत्तर

रिपोर्ट जिला के सभी 09 प्रखंड के आधार पर बनाया गया है. जिला का बेरमो प्रखंड भूजल का अति शोषण करता है. वहीं अन्य सभी प्रखंड सेफ जोन में आते हैं. भूजल गुणवत्ता की बात करें तो जिला का तीन प्रखंड का भूजल पेयजल के लिहाज से अच्छा नहीं माना जा सकता है. जिला के चास, चंदनकियारी व पेटरवार प्रखंड के भूजल में फ्लोराईड की मात्रा पायी गयी है.

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