- अबतक भाजपा के उम्मीदवार रहे थे मजदूर राजनीति से दूर
- 2024 के भाजपा उम्मीदवार ढुल्लू महतो करते हैं मजदूर की राजनीति

संदीप सिंह की रिपोर्ट
मतदाताओं की संख्या के दृष्टिकोण से धनबाद झारखंड का सबसे बड़ा लोकसभा क्षेत्र है. धनबाद लोकसभा क्षेत्र का गठन आजादी के बाद हुए पहले चुनाव के दौरान ही हुआ. पहली बार वर्ष 1952 में यहां चुनाव हुआ. यहां शहरी से ज्यादा ग्रामीण मतदाता हमेशा भारी रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्र में जिसकी चलेगी वही सिकंदर बन सकते हैं. मजदूर बहुल धनबाद के संसदीय इतिहास में पहले मजदूर नेताओं की खूब चलती थी. जिनके साथ मजदूर होते थे, वही चुनाव में बाजी मारते थे. यहां से तीन-तीन बार सांसद रहे एके राय, राम नारायण शर्मा, शंकर दयाल सिंह, चंद्रशेखर उर्फ ददई दुबे की गिनती कद्दावर मजदूर नेताओं में होती थी. भाजपा के मजबूत होने के बाद मजदूर नेताओं की धार कुंद पड़ गयी. भाजपा की टिकट पर चार बार चुनाव जीत कर सांसद बनने वालीं प्रो रीता वर्मा का मजदूर राजनीति से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा. इसी तरह पिछले तीन बार से यहां के सांसद पशुपति नाथ सिंह (पीएन सिंह) भी हमेशा मजदूर राजनीति से अलग रहे हैं. लेकिन, 2024 में धनबाद की राजनीति यू-टर्न लेती नजर आ रही है. धनबाद की राजनीति एक बार फिर से मजदूर की ओर मुड़ती नजर आ रही है.
भाजपा के टिकट पर 2019 तक धनबाद लोकसभा सीट से चुने गये सांसद मजदूर राजनीति से दूर थे. लेकिन, 2024 में भाजपा का उम्मीदवार का जन्म ही मजदूर परिवार में हुआ है. भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बाघमारा विधायक ढुल्लु महतो को उम्मीदवार बनाया है. श्री महतो की राजनीतिक शुरुआत ही मजदूर आंदोलन से हुआ है. जानकार बताते हैं कि ढुल्लू महतो की प्रारंभिक शिक्षा उत्क्रमित मध्य विद्यालय तुंडू से हुई. कतरास डीएवी इंटर कोलज से इंटर की पढ़ाई पूरी की. आर्थिक कठिनाई के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही ड्रॉप करनी पड़ी. पढ़ाई छोड़ने के बाद वह सेल जोगीडीह कोलियरी में काम करने लगे. यहीं से श्री महतो मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने लगे.
समरेश सिंह का मिला साथ और ढुल्लू महतो बन गये टाईगर
साल 1999 में बोकारो समेत झारखड राजनीति के दादा समरेश सिंह ढुल्लू महतो की मुलाकात हुई. समरेश सिंह, ढुल्लू महतो के कार्यों से बेहद प्रभावित हुए. समरेश सिंह ने ही साल 2000 में ढुल्लू महतो को टाइगर की उपाधि दी. इसके बाद श्री महतो ने टाइगर फोर्स नामक संस्था का गठन किया. साल 2009 में उन दिनों झारखंड विकास मोर्चा के सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने ढुल्लू महतो को जेवीएम से बाघमारा विधानसभा का टिकट दिया. 56026 मतों से उन्होंने जीत हासिल की. निकटतम प्रतिद्वंदी जलेश्वर महतो को महज 36606 मतों से ही संतुष्ट करना पड़ा. भाजपा उम्मीदवार ढुल्लु महतो एटक से संबद्ध यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन के बैनर तले कोयला मजदूरों की राजनीति करते हैं. एटक ने उन्हें केंद्रीय सचिव भी बना रखा है. धनबाद लोकसभा क्षेत्र से ढुल्लू महतो के उम्मीदवार बन जाने से एक बात तो साफ है कि घनबाद लोस में एक बार फिर से मजदूर राजनीति की वापसी हुई है. हालांकि, इंडि गठबंधन की ओर से उम्मीदवार का एलान होना बाकी है.